Tuesday, October 16, 2018

ऐसा क्यों ??

' नवरात्रि ' देवी माँ का त्योहार ।
वो देवी माँ जिनको पूरी दुनिया उनकी अपार शक्ति के लिए याद करती है। घर में माँ ,बहन , बेटियाँ सभी पूजा अर्चना एवं उपवास करती है। साथ-साथ मातारानी से प्राथना करती हैं की माता अपनी शक्ति से हमारे घर की सारी विपदाओं को दूर कर हमारी रक्षा करना ।
     शक्ति का रूप मानी जाने वाली कन्याओं की पूजा भी की जाती है एवं उन्हें भोज भी कराया जाता है। उनमें माता की शक्ति विराजमान है ऐसा माना जाता है ।
तो सवाल यह उठता है कि ~ जबतक वह छोटी  होती है तो उसे शक्ति होने का एहसास कराया  जाता है , उसे  शक्ति का रूप माना जाता है परंतु जब उसकी उम्र वही शक्ति दिखाने कि होने लगती है तो उसे क्यों  दबाया जाता है ??
वह शक्ति है उसे जो़र से बोलने दो पर नहीं अपनी आवाज़ धीमी रखो यह कहा जाता है। वह शक्ति है खुद के  बाहरी काम स्वयं  कर सकती है उसे करने दो पर नहीं तुम अकेली  वह काम कैसे करोगी फलां (कोई पुरुष ) को साथ ले जाओ । वह शक्ति है उसे खुद के विरूद्ध कार्य होने पर बोलने दो पर नहीं तुम ज्यादा बहस मत करो लड़की जैसी रहो कहकर चुप  करा दिया जाता है।
                        ऐसा क्यों ???????
बात सिर्फ़ इतनी है कि जिसके लिए हम माँ जगदंबिका की पूजा अर्चना करते हैं और उन्हें जिसका प्रतीक मानते हैं वह सिर्फ़ उन तक सिमट कर न रह जाए। मूर्तिशक्ति के सामने खड़ी समस्त बेटियों , बहनों और माँ में वही शक्ति उस भक्ति के साथ आ जाए कि जब कोई दुराचारी दुष्कर्म करने की ठाने तब वह शक्ति अपनी शक्ति दिखा खुद का बचाव कर सके , अपने हक के लिए कोई भी लड़की , बहन ,बेटी , पत्नी निडर खड़ी हो सके और घरेलू हिंसा के प्रति हर नारी आवाज़ उठा सके । नारी शक्ति को उसकी असीम शक्ति का एहसास कराएँ ।
              " प्रतीक "को सिर्फ़ चिन्ह न रहने दो
              " शक्ति " को यूँ माटी में न घुलने दो
                पहचान खुद की खुद को करने दो
                चुप्पी तोड़ लफ्जों को बहने दो ।
#women_are_shakti

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